इंदौर। इंदौर के छोटा बांगड़दा क्षेत्र में एक रसूखदार कॉलोनाइज़र को सीधा व्यावसायिक फायदा पहुँचाने के लिए प्रशासनिक नियमों और न्यायिक आदेशों की खुली अवहेलना का सनसनीखेज मामला सामने आया है। क्षेत्र के सर्वे क्रमांक 122 की निजी खातेदारी भूमि पर, जिसे राजस्व न्यायालय द्वारा विधिवत आदेश पारित कर बटांकित व सीमांकित किया जा चुका है, उस पर नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से रविवार, 23 अगस्त 2026 को सड़क सीमेंटीकरण के भूमि पूजन की तैयारी की जा रही है।
नायब तहसील आर न्यायालय से पारित आदेश में सभी संबंधित पक्षों की आपसी सहमति से विधिवत तरमीम नक्शा और फील्ड बुक स्वीकृत की गई थी, जिसमें निजी भू-स्वामियों का रकबा पूरी तरह सुरक्षित और बंद ब्लॉक के रूप में दर्ज है।
विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300A और भूमि अर्जन अधिनियम (LARR Act) के तहत किसी भी निजी नागरिक की रजिस्ट्रीकृत भूमि पर बिना औपचारिक भू-अर्जन, अधिसूचना और मुआवजे के सरकारी सड़क बनाना पूरी तरह असंवैधानिक और गैर-कानूनी है। इसके बावजूद बिना किसी अधिग्रहण के सीधे भूमि पूजन रख दिया गया है।
क्षेत्र में प्रसारित निमंत्रण पत्र के अनुसार, क्षेत्रीय पार्षद श्रीमती ममता सुभाष सुनेर के मुख्य आतिथ्य में हाइलिंक सिटी मेन गेट से बाबू मुराई कॉलोनी होते हुए एयरपोर्ट रोड तक सड़क का भूमि पूजन होना है।
सूत्रों और स्थानीय रहवासियों का कहना है कि एक निजी कॉलोनाइज़र, जिसकी जमीन पास में ही स्थित है, अपनी कॉलोनी के रास्ते का दबाव कम करने और प्रोजेक्ट को महंगे दामों पर बेचने के लिए स्थानीय पार्षद और निगम अधिकारियों को गुमराह कर रहा है।
आरोप है कि वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और पूर्व विधायक के नामों की आड़ लेकर इस पूरी गैर-विधिक प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है, जबकि राजस्व रिकॉर्ड में इस निजी जमीन पर किसी सड़क का अस्तित्व दर्ज नहीं है।
बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम के जोनल इंजीनियर और जनकार्य विभाग ने बिना राजस्व रिकॉर्ड (खसरा, नक्शा तरमीम) की जांच किए किसी निजी बटांकित जमीन पर सड़क का प्राक्कलन और टेंडर कैसे तैयार कर दिया? क्या जनहित और जनता की सुविधा का नाम लेकर किसी नागरिक की निजी संपत्ति को हड़पने और उस पर सरकारी धन खर्च करने की छूट दी जा सकती है?